Sunday, 26 February 2017

/.. मौसम बदल गया हैsssss !! .. दिल्ली में फॉग साफ़ - कचरा साफ़ - प्रदूषण गायब - मौसम रंगीन - बसंत बहार - बागों में बहार .. .. अब अंजना ओम कश्यप और संबित पात्रा को निर्बाध साँसे लेने में कोई दिक्कत नहीं .. दिल्लीवासियों के मुंह से भी मास्क गायब .. .. और दिल्ली स्थित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी अब दूरदृष्टि ही चालू - निकटदृष्टि बंद .. यानि अब दिल्ली लोकल में क्या हो रहा है अब क्या करना धरना ?? .. है ना !! .. ..

कारण ?? .. पंजाब गोवा में जहां से 'आप' पार्टी मैदान में थी वहां मतदान शुरुआत में ही संपन्न हो गए - और अब तो विशेष रूप से यूपी जहां से 'आप' पार्टी चुनाव में किसी की ऐसी की तैसी नहीं कर रही है वहां के अंतिम चरण ही चल रहे हैं  - और इसलिए वहां प्रदूषण आदि की बातें ना होकर प्रदूषित बातें हो रही हैं .. वहां तो गधों जैसे ऊटपटांग और साम्प्रदायिकता की बातें ही चल रही हैं .. और मीडिया भी गधों जैसे दिन रात अपने काम में दूरदृष्टि के साथ लगा पड़ा है .. ..

मैं कहता ना था .. अब दिल्ली दूर नहीं - विशेषकर दिल्ली में बैठ और पैठ जमाकर केजरीवाल के लिए तो बिलकुल भी नहीं .. !! जय हिन्द !!

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
/.. एक और 'मन की बात' निपट गई ....
जिस बात से मोदी जी ने मन की बात की शुरुआत की थी - मैं मेरी प्रतिक्रिया की शुरुआत और अंत भी उसी बात से करता हूँ .. मोदी जी मौसम बदल गया हैssssssss !!..../

टीप : वैसे मुझे लगता है कि इसरो की गूगल से कोई दुश्मनी तो होगी नहीं जो उसकी जानकारी फेंकने का अधिकार केवल मोदी जी के पास सुरक्षित रखा हो .. हाँ बाकी की बातें फांकने का अधिकार तो मोदी जी के पास सुरक्षित है सो उसके उपयोग हेतु मोदी जी ही जाने और उनका काम जाने .. मुझे तो फ़ोकट बातें लुभाती नहीं हैं .. ..

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// मोदी का जाना और केजरीवाल का आना तो बिना विकल्प तय है ....//


जब जमी-जमाई कांग्रेस के ज़माने में भ्रष्टाचार के प्रकरण सामने आने लगे थे तो अक्षम विपक्षी भाजपा का वर्चस्व बढ़ा और शायद सही बढ़ा .. क्योंकि तब के माहौल में मजबूत कांग्रेस को शिकस्त देने के लिए विपक्षी पार्टी के मोदी जैसे व्यक्ति के अलावा कोई और विकल्प नहीं था .. और मोदी जी को धन्यवाद कि उनकी बदौलत कांग्रेस हारी और सत्ता से अपदस्थ हुई .. ..

पर अब जब मोदी भी घोर रूप से असफल हो रहे हैं - और सब दूर अव्यवस्था भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और दादागिरी चिल्लाचोट अविश्वास लड़ाई झगडे विद्वेष असहिष्णुता का अति दूषित और निराशा भरा माहौल बनता ही जा रहा है - तो मोदी का जाना भी उतना ही आवश्यक हो चला है जितना उस वक्त कांग्रेस का जाना हो चला था .... बल्कि पानी सिर के ऊपर से निकल रहा है और ऐसा होना अपेक्षाकृत कहीं अधिक आवश्यक हो चुका है .. ..  

और यहां गौरतलब है कि उस वक्त कांग्रेस का जाना ज्यादा आवश्यक था ना कि डॉक्टर मनमोहन सिंह का .. पर आज तो मोदी का जाना तो आवश्यक है ही - पर भाजपा का जाना भी आवश्यक है - क्योंकि भाजपा में मोदी से कई लोग अधिक काबिल होते हुए भी कोई भी प्रधानमंत्री के लायक तो नहीं दिखता - और भाजपा का डीएनए भी अब इस धर्मनिरपेक्ष देश के मिज़ाज़ के माकूल नहीं लगता .. ..

पर क्या आज कमज़ोर हो चुकी कांग्रेस में सत्तासीन मोदी को हराने की क्षमता बची दिखती है ?? .. कदापि नहीं !!

तो फिर विकल्प क्या है ?? .. विकल्प है कोई "और" जो कांग्रेस का स्थान ले विपक्ष की भूमिका निभाए .. क्योंकि वैसे भी प्रजातंत्र के सफल क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावकारी विपक्ष की आवश्यकता होती ही है .. ..

और मुझे लगता है कि केजरीवाल की 'आप' पार्टी बहुत ही अप्रत्याशित गति से प्रत्याशित विपक्ष का स्थान ग्रहण कर रही है .. और पंजाब और गोवा जीत के बाद वो एक निर्णायक स्तर पर आकर अति समस्याग्रस्त मोदी को ज़ोरदार टक्कर देते हुए ठोकर मार सत्ता पर काबिज़ होते दिखती है .. ..

पर यदि ऐसा नहीं होता है तो ?? .. मुझे तब भी लगता है - कि मोदी का जाना तय है और केजरीवाल का आना भी तय है .. इसलिए कुछ ऐसा तो होगा ही .. .. !! जय हिन्द !!

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Saturday, 25 February 2017

/.. ब्रेकिंग न्यूज़ .. .. कमज़ोर विपक्षियों से जीत रही डींगें मारने वाली भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया से पहले ही टेस्ट में बुरी तरह पिट गई ....
वैसे मैं ना तो जन्मपत्री या राशिफल या नक्षत्र आदि पर ही विश्वास रखता हूँ - पर मुझे लगता है कि ठीक ऐसे ही - कांग्रेस से जीत रही डींगें मारने वाली भारतीय जनता पार्टी भी 'आप' पार्टी से बुरी तरह पिटेगी .... हा !! हा !! हा !! ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

Friday, 24 February 2017

/.. याद आया वो डायलॉग .. " कार के नीचे कुत्ते का पिल्ला भी आ जाता है तो दुःख होता है कि नहीं ?? .. होता हैssss !! " .... और फिर उसके बाद की सफाई कि - कुत्ते का पिल्ला उनको नहीं बोला था वस्तुतः जिनको बोला था .. ..
और इसलिए आज मुझे भी समझ आ गया कि लड़के ने जिसे गधा कहा है वो वही गधा है जिसे गधा कहा है .. .. कोई शक़ ?? - कोई आपत्ति ?? .. नहीं ना !! तो आइये आप भी गाइये ....
जंगल दंगल बात चली है पता चला है ..
अरे लड़के ने तो गधे को ही गधा कहा है ..
जंगल दंगल पता चला है गधा कहा है गधा कहा है .. .. .. ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// अमेरिका में हुई एक निर्दोष भारतीय की हत्या पर बहुत कुछ सोचने की आवश्यकता ..//


अमेरिका में नस्लभेदी एवं 'अमेरिका छोड़ो' के नारे लगाते हुए एक कट्टरवादी अमेरिकन ने शायद अपने देश की भलाई की चेष्टा में और अपनी आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करने हेतु एक भारतीय इंजीनियर की हत्या कर दी .. ..

बहुत अफ़सोस !! .. बेहद दुर्भाग्यपूर्ण !! .. बेहद अन्यायपूर्ण !! .. ..

पर कल्पना करें कि .. .. भारत में नस्लभेदी एवं 'भारत छोडो' के नारे लगाते हुए एक कट्टरवादी भारतीय शायद अपने देश की भलाई की चेष्टा में और अपनी आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करने हेतु एक पाकिस्तानी या बांग्लादेशी या सूडानी या ईरानी या अफ्रीकन मूल निवासी की हत्या कर दे .. .. तो भी क्या ठीक उतना ही .. .. .. .. "बहुत अफ़सोस .. बेहद दुर्भाग्यपूर्ण .. बेहद अन्यायपूर्ण" ?? .. ..

सोचियेगा .... और सोचियेगा तब ही शायद आप केवल हिंसा से नफरत करियेगा .... बाँटने वालों - लड़ाने वालों - हिंसा करने कराने वालों - घृणित राजनीति करने वालों से नफरत करियेगा .... और शायद तब ये नफरत किसी धर्म जाति या देश प्रदेश की सीमाओं से प्रभावित नहीं होगी .... और शायद तब आप महात्मा गांधी के "अहिंसा परमो धर्म" के मर्म को भी समझियेगा - और थोड़े से तर्क के बाद सुभाष चन्द्र बोस और भगत सिंह की वीरता और उपयोगिता को भी समझियेगा .. ..

और शायद तब ही ठीक-ठीक समझियेगा कि अमेरिका के ट्रम्प और भारत के जोकर में क्या समानताएं हैं .. .. और ये भी कि इधर हमारे बीच में भी तो कई कट्टरवादी सिरफिरे सिर उठाए हुए हैं जो दिनरात सांप्रदायिक बातों से ही फुरसत नहीं पा पाते हैं .. ..

अन्यथा गर्राते रहियेगा कि आप सबसे बड़े देशभक्त - और देशभक्त से भी बड़े वाले - केवल भक्त !!

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// ये इंसान अपने आपको इंसान कहने से इतना कतराने क्यों लगा है ?? ....//


तब की बात .. मैं शेर !! .. क्यों ?? .. मैं शेर - क्योंकि शेर ही जीतता है ..
अब की बात .. हाँ मैं गधा हूँ .. गधा मेहनती होता है .. ..

क्या भरोसा - २०१९ आते आते इनकी आगे की संभावित बात .. ..
हाँ मैं सूअर हूँ .. सूअर हर हालात में जी लेता है .. ..
हाँ मैं लोमड़ हूँ .. लोमड़ समझदार होता है .. ..
हाँ मैं सांप हूँ .. सांप कहीं भी घुस जाता है .. ..
हाँ मैं उल्लू हूँ .. उल्लू रात में खुद दिखता नहीं .. ..
हाँ मैं कुत्ता हूँ .. कुत्ता काट भी लेता है .. ..

पर मेरे दिमाग की बात - दिल से .. ..

ये इंसान अपने आपको इंसान कहने से इतना कतराने क्यों लगा है ?? .. क्या ये आत्मग्लानि का परिचायक है - या पशुवृत्ति - या फिर उकसावे का वशीभूत ?? .. ..

ये कभी ऐसा क्यों नहीं मानते कि ये भी एक इंसान ही हैं - एक आम आदमी जैसे ही तो हैं .. शायद ऐसा इसलिए नहीं कहते होंगे कि ऐसा तो एक 'आम आदमी' भी कहता है .. और ये कुछ ख़ास ना होते हुए भी आम बात करना पसंद नहीं करते .. शायद यही इनकी असलियत भी है और शख्सियत भी .. शायद यही इनकी आदत भी है और फितरत भी .. .. 

और इसलिए अब मेरा विश्वास बढ़ता जा रहा है कि एक इंसान के आगे फिर भले ही वो एक आम आदमी ही क्यूँ ना हो .. सारे शेर सूअर लोमड़ सांप कुत्ते उल्लू गधे सब ढेर हैं .. हाँ हाँ - हा !! हा !! हा !! .. ..

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