Sunday, 24 September 2017

// मोदी जी खबरदार !! - आपके 'मन की बात' को 'देश की मन की बात' नहीं बताएं ..//


आज फिर ३६ वीं बार मोदी जी ने मनमानी करी और अपने "मन की बात" करी .. पर अपने डीएनए का परिचय देते हुए कह दिया कि - " यह देश की मन की बात है, मेरे मन की बात नहीं है " .. ..

अब मेरे दिल दिमाग की बात तो ये है कि .. ..

मोदी जी ने जो कही उनके ही मन की बात कही - शर्तिया !! - पर क्योंकि कही गई बात बकवास मानी जाने लगी तो मोदी जी ने इसे देश के मत्थे मढ़ दिया .. और मोदी जी का ये कृत्य शर्मनाक है - क्योंकि इस तरह देश को बदनाम या लज्जित करना उचित नहीं .. .. और मोदी जी को कोई हक़ नहीं बनता कि वो फेंकने की हदें पार कर अपने 'मन की बात' को 'देश की मन की बात' बताकर अनापशनाप फेंकते रहें - जबकि पूरा देश उनसे समय-समय पर कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर देश के सामने अपनी बात करने के लिए इंतज़ार ही करता रह गया .. ..

मसलन देश चाहता है कि मोदी बात करें देश की अर्थव्यवस्था की - बेरोज़गारी की - शिक्षा की - बढ़ते भ्रष्टाचार की - गरीबों की - दलितों की - बढ़ती महंगाई की - रोहिंग्या की - फैलाए जा रहे सांप्रदायिक वैमनस्य की - मेहबूबा सरकार की - संघ की बुराइयों की - जेएनयू की - आपके विरोध में उठ रही कन्हैया रवीश अभिसार ध्रुव राठी विनोद दुआ आदि जैसी सैंकड़ों आवाज़ों की - और यूनिवर्सिटी में छात्रों के अहितों की - और राजनैतिक हत्याओं की - भाजपाई एवं अन्यों द्वारा की जा रही गुंडागर्दी की - और लाला रामदेव की और राम रहीम की और हनीप्रीत की भी .. .. और आपके कुछ भक्तों की दयनीय पाश्विक मानसिक स्थिति की भी !! .. ..

इसलिए मोदी जी खबरदार !! .. लफ़्फ़ाज़ी बंद करें और या तो चुप रहकर कुछ काम करें - या कम से कम अपने 'मन की बात' अपने ही 'मन की बात' कह कर ही करें .. अब तो हमें भी कोई विशेष आपत्ति नहीं होगी - क्योंकि हम भी ३ साल से आपकी बकवास सुन-सुन कर आदि जो हो गए हैं .. है ना !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

// सरकार तो बेपटरी ही लगती है ..//


बस रफ़्तार बुलेट जैसी ..
ज़िन्दगी ठहरी सी लगती है ..

शर्म आती है देखकर ..
गाड़ी बेपटरी सी लगती है ..

मासूम को बस माँ का सहारा ..
माँ खुद बेसहारा !!

बातें बस गाय गंगा माँ की ..
सरकार तो बेपटरी ही लगती है .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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Saturday, 23 September 2017

// रोहिंग्या बस गए - कश्मीरी पंडित क्या भुट्टे सेंकते रहे ?? .. ..//


अपनी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में भी कई तर्कशास्त्री हैं - जिनमें से एक ने तर्क प्रस्तुत किया है .. ..

" धारा-३७० के बाद कोई बाहरी व्यक्ति कश्मीर में बस नहीं सकता - फिर वहां रोहिंग्या मुस्लिम गांव बनाकर कैसे बसे !! .. धारा सिर्फ अपने देशवासियों के लिए है क्या ?? " .. ..

मेरी प्रतिक्रिया .. ..

धारा-३७० के बारे में बचपन से सुनते आए - कश्मीरी पंडितों के बारे में जवानी से - और अभी रोहिंग्या के बारे में बुढ़ापे में ही सुना है .. कस्सम से !! .. ..

और उपरोक्त वाजिब प्रश्न के जवाब में इसलिए एक और प्रश्न उठता है कि जब रोहिंग्या कश्मीर में बस गए तो ये कश्मीरी पंडित क्यों नहीं बस पाए ?? .. और क्या ये भुट्टे सेंकते रहे ?? .. और ये अनुपम खेर और अशोक पंडित कब तक बेचारे चिल्ला-चिल्ला कर दहाड़ते हुए याचना ही करते रहेंगे ?? .. और संघी भाजपाई प्रवक्ता उन्हें हमेशा उत्तेजित करते हुए कब तक पुचकारते ही रहेंगे ?? .. ..

तो क्या कश्मीरी पंडित रोहिंग्या से भी बेचारे हैं ?? .. या फिर नकारे हैं ?? .. या फिर हमारी सरकारें बहुत ज्यादा वोट-परस्त हैं या दोगली हैं या निकम्मी नकारा हैं .. या फिर मजबूर हैं ?? .. .. और इसलिए हमारे प्रधानसेवक और उनके भक्त भी अब तक ५६ -५६ -५६ की तो रटन करते रहे पर मुहँ से ३७० तो कभी निकला ही नहीं .. फेंकू कहीं के !! .. ..

पर फिर एक और प्रश्न उठता है कि क्या कश्मीर की सरकारें राष्ट्र विरोधी तो नहीं रहीं जो आज तक केंद्र सरकार को मजबूर रखे रहीं ?? .. और क्या ये बुआ मेहबूबा की सरकार भी कहीं राष्ट्र विरोधी तो नहीं ?? .. तो क्या भाजपा जो जेएनयू में देशप्रेम के डंके पीट रही थी असल में उसे कश्मीर में जाकर तलवारें नहीं भांजनी थीं ?? .. और जिन टुच्चे देशभक्तों ने कन्हैया कुमार को साज़िशन गिरफ्तार किया था क्या उन्हें मेहबूबा को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए था ?? - चाइये था ना - चाइये था ना !! .. ..

ओफ्फ़ ओह !! .. आप भी सोच रहे होंगे कि मैं कहाँ से कहाँ पहुँच गया .. पर बता दूँ कि ये मामला बहुत लम्बा रहा - जिसे मैंने बचपन से बुढ़ापे तक अनुभव किया है - और मैं अब जाकर सही ठिकाने पहुंचा हूँ !! .. और मैं आज फिर से संतुष्ट हुआ हूँ कि आज की तारीख में मेरा मोदी-संघ-भाजपा विरोध बिल्कुल जायज़ है - और देशहित में है .. और इसके लिए उपरोक्त प्रश्नकर्ता और पोस्टकर्ता को बहुत-बहुत साधुवाद !! .. !! जय हिन्द !! .. !! वंदे मातरम् !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

// ये जो पुलिस वालों की तोंद के पीछे पड़े हैं ना - इन्हें जूते मार-मार कर दुबलाया जाए ..//


कुछ दिन पहले अखबार में गृहमंत्रालय दिल्ली के हवाले से एक खबर छपी थी कि अब तोंद वालों और भ्रष्ट पुलिसवालों को सरकार से मैडल नहीं मिलेगा .. ..

पर मैडल बांटने का काम हथियाए इन अहंकारियों की दयनीय और शोचनीय स्थितियों के मद्देनज़र मेरी रोष भरी पर बिना गाली संवेदनशील प्रतिक्रिया .. ..

ऐसी तर्कसंगत उचित इंसाफ़ी कार्यवाही केवल पुलिस वालों के साथ क्यों ?? .. अन्य के साथ क्यों नहीं ?? .. ..

मसलन .. तो फिर क्या अमित शाह अरुण जेटली या गडकरी को भी पुरुस्कृत किया जाना निषेध नहीं कर देना चाहिए ?? .. ..

और मुझे एक और बात पर आपत्ति है कि केंद्र सरकार अब भ्रष्ट पुलिस वालों को नौकरी से निकाल बाहर करने की इच्छाशक्ति या क़ाबलियत या हैसियत या इरादा नहीं रखती !! .. और शायद उसे भ्रष्टाचार से अब कोई परहेज़ ही नहीं है !! .. ..

भ्रष्टाचार से विरोध तो केवल तब तक था जब तक मोदी प्रधानमंत्री नहीं बने थे - और देश को बरगलाने में मशगूल थे .. और शायद अब बात यहाँ तक पहुँच गई है कि यदि पुलिस वाला भ्रष्ट होगा तो उसे मैडल नहीं मिलेगा - पर यदि भाजपाई भ्रष्ट होगा तो ही उसे कोई पद भी मिलेगा !! .. .. और यहां तक कि अब तो मोदी का प्रयास है कि विधायक-सांसद न्यायालय से सज़ा पाने के बाद भी विधायक-सांसद बने रहें .. और ये शायद इसलिए भी कि भाजपा में अपराधियों की ही भरमार जो हो चली है .. और यदि एक काम से गया तो पूरी पार्टी के साथ-साथ मोदी के काम भी लग जाएंगे .. ..

और अब तो हमने मोदी सरकार की ये नीति भी देख ली कि यदि कोई बाबा भाजपा समर्थित हो तो उसका हर प्रकार का व्यापार - फिर चाहे वो नंबर २ का व्यापार हो - या योग संयोग का - या चूरन मंजन का - या नेतागिरी का - या धार्मिक धंधे का - या आर पार का देह व्यापार ही क्यों ना हो - सब फलने फूलने दिया जाए और उसे सरकारी सहायता और सहूलियतें भी दी जाएं .. और उसके साथ हमाम में गोते भी लगाए जाएं .. ..

पर यदि कोई आम व्यापारी भाजपा समर्थित ना हो तो उसको ईमानदारी से व्यापार भी ना करने दिया जाए .. और यदि कोई पत्रकार या लेखक या कलाकार भाजपा समर्थित ना हो तो उसे डराया जाए धमकाया जाए ट्रोल किया जाए या मौत के घाट उतार दिया जाए .. और उसके बाद मृतक को गालियां दी जाएं और गालियां देने वालों को मोदी ट्विटर के जरिये 'मैडल' बांटे .. और बेचारे पुलिस वाले टुकुर-टुकुर देखते रहें .. ..

यानि कुल मिला के स्थिति ऐसी है कि ये जो पुलिस की तोंद की बात कर रहे हैं ना - इनके तो दोनों गाल भी पुलिस वालों की तोंद जैसे हो गए हैं - और इनकी मोटी चमड़ी अब खारिशी भी हो गई है .. ..

और अब आवश्यकता आन पड़ी है कि इनको मैंटल मानकर इनकी जूते मार-मार कर इनके तन-मन की छंटाई की जाकर इनको दुबलाया जाए और सूत-सांवल में लाया जाए - वो भी बिना किसी मैडल के .. ..

बस मेरा सुझाव इत्तू सा !! ..
बाक़ी यदि आपकी भी कोई हसरतें हों तो आप अपनी भी पूरी करें .. !! धन्यवाद !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Friday, 22 September 2017

// अफ़ज़ल तो काफी निकले - कुछ पीडीपी में कुछ भाजपा में गए - बचे मार गिराए गए ..//


एक भक्तू ने व्हाट्सएप पर एक कैप्शन डाला है .. ..

" अच्छा एक बात पूछनी थी - वो घर घर से अफ़ज़ल निकलने वाली स्कीम का क्या हुआ - इंडियन आर्मी पूछ रही है " .. ..

भक्तू को जवाब नहीं मालुम क्योंकि वो शर्तिया अज्ञानी है .. इसलिए भक्तू को जवाब मैं दे देता हूँ .. ..

मुझे लगता है अफ़ज़ल काफी निकले .. और ज्यादातर मेहबूबा बुआ की पीडीपी में शामिल हो गए और काफी बचे भाजपा में - और अंतिम बचे आर्मी द्वारा मार गिराए गए !! .. ..

तो भक्तू !! अब कोई भी आर्मी वाला प्रश्न पूछे तो उल्लू जैसे इधर उधर मत ताकने लगना - बल्कि जवाब दे मारना .. समझे !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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// मोदी जी !! ..सज़ायाफ्ता अपराधियों के प्रति ऐसी वफादारी अच्छी बात नहीं !! ....//


नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा - कोर्ट में दोषी पाए गए विधायकों-सांसदों की सदस्यता तत्काल रद्द होना जरूरी नहीं .. ..जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साल २०१३ में लिली थॉमस बनाम केंद्र सरकार के मामले में फैसला दिया था कि सजा होते ही विधायक या सांसद की सदस्यता चली जाएगी .. ..

मेरी प्रतिक्रिया .. ..

धोखेबाज़ लफ़्फ़ाज़ झूठा नकारा निकम्मा भ्रष्ट फेंकू पलटू निर्लज्ज बेशर्म दोगला टुच्चा आदि अपशब्द मैं कहना नहीं चाहता - क्योंकि कुछ भक्तू नाराज़ होते हैं - इसलिए यही कहूंगा कि मोदी जी सज़ायाफ्ता अपराधी विधायकों-सांसदों के प्रति ऐसी वफादारी ?? .. ये तो अच्छी बात नहीं है !! .. ..

ऐसा ही चला तो आप तो भविष्य में यही कहोगे कि किसी भी भाजपाई विधायक-सांसद को सजा होने पर उसे जेल ना भेजा जाए .. उसे गुफा में भेजा जाए !! .. वो भी उनकी 'हनीप्रीत' के साथ .. है ना !!

नहीं माननहीं मोदी जी - ये तो बिलकुल भी अच्छी बात नहीं है !! .. समझे ??

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Thursday, 21 September 2017

// बाँध टूट गया - क्या सब्र का बाँध और बंधन टूटेगा ?? .. अब भक्त चुप क्यों ?? ..//


बिहार में बांध टूट गया !! .. नितीश दोगले के राज में टूट गया !! .. ..

अब बाँध की असल लागत कितनी कम थी ये तो अनुमान ही लगाया जा सकेगा - पर सरकारी तिजोरी से खर्च ३०० करोड़ से भी ज्यादा का कर मारा गया था .. और माननीय दोगले इसका उदघाटन करने ही वाले थे - कि झकोरा बाँध टूट गया - इज़्ज़त लूट गया - बेशर्मी उढ़ा गया .. ..

पर भक्त स्तब्ध हैं - मानो जैसे JNU जैसी हार हो गई हो !! .. .. क्यों ?? .. क्योंकि दोगला अब NDA में है - और उनका अपरिवर्तनीय DNA भी बदल गया है - और मोदी भक्तों का DNA तो मोदी जैसा है ही - अपरिवर्तनीय !! .. ..

वैसे भी मैं सोच रहा था कि अब जब बाँध टूट गया है .. और NDA के मंत्रिमंडल विस्तार में दोगले दुत्कारे जा चुके हैं - तो क्या किसी के सब्र का बाँध भी तो नहीं टूट जाएगा ?? .. और क्या NDA से बंधन भी तो नहीं टूट जाएगा ?? .. ..

और मेरा दिमाग कहता है कि - ना तो सब्र का बांध टूटेगा और ना ही ये बंधन टूटेगा .. क्योंकि मोदी और नितीश का DNA तो अब मिलता ही है .. ..

और कमलगट्टों और भक्तों को भले ही ना मालुम हो पर हर पढ़े-लिखे समझदार को मालुम है कि ..
(-) + (-) = (+) नहीं होता है - बल्कि हमेशा (-) ही होता है .. यानि ..
एक की (दोगलाई) + एक की (चालाकी) कभी भी सकारात्मक परिणाम तो दे ही नहीं सकती .. यानि इनका बंधन तो टूट ही नहीं सकता .. और इसलिए इस बार उचंगी बड़बोले भक्तों की चुप्पी भी टूट ही नहीं सकती .. शर्तिया !! .. है ना !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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