Saturday, 20 January 2018

// कौन-कौन राष्ट्रद्रोही ??.. और 'प्रधानपद्मावत' की छाती कितने इंच की ??.. ..//


अब करणी सेना के राजस्थानी नेता मकराना ने खुल्लेआम भारतीय सेना से आह्वाहन कर दिया है कि पद्मावत फिल्म के विरोध में सेना एक समय मेस का बहिष्कार करे और माँग ना माने जाने पर एक दिन शस्त्र रख दे..

और करणी सेना ने ये भी कहा है कि जनता कर्फ्यू लगेगा और जो पद्मावत फिल्म देखेगा वो राष्ट्रद्रोह करेगा..

और भाजपा की सरकारें और करणी सेना मिली-जुली घुली-मिली साँठ-गाँठ करते हुए गुंडागर्दी होने दे रही हैं और असल राष्ट्रद्रोह भी..

जी हाँ - असल राष्ट्रद्रोह !!.. यानि कन्हैया हार्दिक वाला नहीं - और ना ही जेएनयू वाला वो 'इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह टुकड़े टुकड़े' वाला राष्ट्रद्रोह जिसमें बुआ के घर में छुपे एक चूहे की भी शिनाख्त तक ना हो पाई हो..

जबकि भाजपा की सरकारें अभी भी सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्णय के बावजूद बगले झांक रही है और पूरी बेशर्मी के साथ अकर्मण्य नकारा ग़मगीन हो 'पद्मासन' में बैठी-बैठी सी है.. और अध्ययनरत भी..

और सन्न भक्त सुन्न पड़े किसी की 'पद्मासनी' गोदी में दुबके पड़े हैं..

यानि स्थितियां भयावह विकट हैं..

इसलिए समय आ गया है कि जनता तय करे कि क्या करणी सेना अकेली दोषी है या भाजपा की सरकारें भी.. और 'प्रधानपद्मावत' की छाती कितने इंच की ??..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

कपिल मिश्रा ने ठोक मारी.. कुमार विश्वास ने छोड़ मारी..


// भाजपाई-कॉंग्रेसी ज्यादा ही उत्साहित और 'आपियन्स' ज्यादा ही विचलित क्यों.. //


चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और राष्ट्रपति भी..
दोनों संस्थाओं के बीच कुछ पत्राचार का आदान प्रदान होता है - और जो पत्र चुनाव आयोग के द्वारा राष्ट्रपति को प्रेषित होता है उसका मजमून तत्काल ही सार्वजानिक हो जाता है.. और सार्वजनिक होते ही मीडिया में और सत्तापक्ष भाजपा और विपक्ष कॉंग्रेस में हर्ष उल्लास का छा जाना भी सार्वजनिक हो जाता है - और तत्काल बयानबाजी और जुमलेबाजी शुरू हो जाती है - और बिका हुआ ऊँघ रहा मुस्तैद मीडिया चाकचौबंद हो अपनीवाली पर आ जाता है..

और ये सब इसलिए होता है कि तथाकथित रूप से चुनाव आयोग के उस पत्र में राष्ट्रपति को 'आप' पार्टी के २० विधायकों की सदस्य्ता रद्द करने की सिफारिश की गई होती है.. और तत्काल ये मान लिया जाता है कि सिफारिश पूर्ण है उचित है न्यायसंगत है और वैधानिक भी है - और इसलिए मानने योग्य हो राष्ट्रपति द्वारा माननी ही पड़ेगी - और इसलिए मान ही ली जाएगी..

इसके इतर जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा पद्मावत के पक्ष में और ४ भाजपाई खुजली सरकारों के विरुद्ध निर्णय पारित होता है जो तत्काल सार्वजनिक होता ही है - तो उस विषयक सारी सरकारें और मीडिया भी उस निर्णय के अध्ययन में तल्लीन और ग़मगीन हो जाता है - और प्रतिक्रया देने तक से बचता फिरता है.. यानि मानों इन बेचारों के अस्तित्व की सदस्यता ही रद्दी हो गई हो..

खैर चुनाव आयोग के 'आप' विरुद्ध निर्णय के संदर्भ में मैं पाता हूँ कि सम्पूर्ण सत्तापक्ष और विपक्ष अत्यंत उत्साह दिखाने का प्रयत्न कर रहा है .. परन्तु मुझे यकीन है कि वो अंदर से इतना उत्साहित है नहीं.. कारण ये कि चूना आयोग सिद्ध हो चुके चुनाव आयोग के इस निर्णय या फैसले से भविष्य में इन सभी को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.. और जबकि इस निर्णय से 'आप' पार्टी का बाल बांका भी नहीं होने वाला..

पर इस निर्णय से 'आप' पार्टी के समर्थकों में मैं थोड़ी ज्यादा ही निराशा देख रहा हूँ.. जबकि मुझे नहीं लगता कि ये कोई बहुत बड़ी निराशा की बात सिद्ध होगी.. ये मैं इसलिए कह रहा हूँ कि यदि आपने जानबूझकर कोई गलती नहीं की है - और मान लें कि कोई गलती हो ही गई है.. तो इसमें निराश होने की आवश्यकता से अधिक सबक लेने की ही तो जरूरत है.. और यदि कोई ये मानता है कि ये गलती जानबूझकर करी गई है तो फिर तो थोड़ा सब्र कीजिए.. देखिए कि ये गड्ढा-खोद निर्णय किसके लिए नुकसानदेह या घातक सिद्ध होता है - और तब तक तो निराश होने की जरूरत नहीं..

इसलिए कुल मिलाकर मेरा निष्कर्ष यही है कि भाजपाई-कोंग्रेसी जितने उत्साहित दिख रहे हैं उतने उत्साहित हैं नहीं.. और 'आपियन्स' जितने निराश दिख रहे हैं उतना निराश होना बनता ही नहीं..

और भाजपाई-कॉंग्रेसी ज्यादा ही उत्साहित और 'आपियन्स' ज्यादा ही निराशा क्यों ??..
क्योंकि भाजपाइयों-कोंग्रेसियों में मक्कारी कूट-कूट कर भरी है - और आपियन्स में मक्कारी की नितांत कमी है और सच्चाई ज्यादा है - जिसके कारण वे जल्दी विचलित हो जाते हैं - छुईमुई हुए जाते हैं.. ..

पर मेरा दिल ये भी कहता है कि 'आपियन्स' जैसे हैं अच्छे हैं.. !! जय हिन्द !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Friday, 19 January 2018

// अपराध रोकथाम हेतु न्यूनतम आवश्यक शुरुआत तो करो.. ..//


पहले दिल्ली के एक स्कूल में और अब लखनऊ के एक स्कूल में एक नाबालिग मासूम छात्र पर स्कूल के ही नाबालिग अन्य छात्र द्वारा हत्या जैसी हरकत करना पूरे समाज के लिए झकझोरने वाली घटनाएं हैं.. और फिर हरयाणा में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की एक नृशंस श्रंखला भी सामने आ रही है.. और पूरे देश की कानून व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं.. और यहाँ तक की न्याय व्यवस्थाएं भी.. और देश में हर स्तर पर विघटन बढ़ रहा है.. और प्रधानसेवक मस्त पस्त सुस्त पड़ा है..

उपरोक्त ताज़ी और अन्य अनेकानेक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में मेरी प्रतिक्रिया..

आजकल कौन शान्ति की बात कर रहा है.. और कौन बच्चों को प्रेम प्यार प्रीत सौहार्द भाईचारे परोपकार अहिंसा या अपने से गरीब की मदद सच्चे का साथ आदि की बातें सिखा रहा है ?? .. और कौन हमें अच्छाई हेतु प्रेरित कर पा रहा है..

मेरा जवाब है कोई नहीं.. और इसके लिए कौन दोषी ??.. वो सभी धार्मिक प्रवचनकर्ता शिक्षक और अभिभावक जिनके जिम्मे यह काम हुआ करता था..

और उलट इसके बच्चों के मन में कौन हिंसा मार काट लड़ाई झगडे की बातें भर रहा है ??.. वही सब धार्मिक ठेके प्राप्त प्रवचनकर्ता शिक्षक और अभिभावक जो आजकल स्वयं भी गलत बातों में उलझे सने पड़े हैं..

मसलन हर धर्मिक बातों में युद्ध रण ललकार अस्त्र शस्त्र तीर बाण मार काट दांव-पेंच तलवार भाला त्रिशूल की ही बातें तो बताई जा रही हैं.. महाभारत का युद्ध ही तो घुटाया जा रहा है.. राम रावण कृष्ण अर्जुन भीम आदि सभी के युद्ध से जुड़े पक्ष को ही तो पेश किया जा रहा है ??..

और स्कूल में भी बच्चों को हर हालत में हर स्पर्धा जीतने के लिए ही तो प्रेरित किया जाता है - है कोई स्कूल जिसमें हारने में भी जीत की बारीक बातें समझाई जाती हों.. त्याग और परोपकार की बातें पढ़ाई जाती हों.. है कोई ज्ञानी शिक्षक जो अपनी समस्याओं से परे इस ओर सोच भी सके कि मासूम बच्चों को क्या और कैसे बताया पढ़ाया सिखाया जाए..

और यही हाल अभिभावकों के हैं जो बच्चों को खिलौने भी गन पिस्टल टैंक आदि लाकर देते हैं.. और बच्चे से ठाँय-ठाँय करवा कर खुश होते रहते हैं.. बच्चे को बहादुर बता उसकी तारीफ करते नहीं थकते..   

और हमारे समाज में अच्छाइयों को ठूंसने का ठेका अपने नाम करने वाली संस्थाएं समाज में केवल धर्म जाति और सत्ता की राजनीति ही तो कर रही हैं.. जो हमेशा तोड़ने की बातें करती हैं और विपक्षी को मात देने के लिए शह देने के गुर सिखाती हैं और क्रियान्वित कराती हैं..

माफ़ करियेगा जो उपरोक्त घटनाएं घटित हुई हैं वो तो अभी शुरुआत ही है.. और अगर ऐसा ही चलता रहा तो निकट भविष्य में देखिएगा कि नाबालिग या युवा ऐसे-ऐसे अपराध करेंगे जिन पर उन्हें पछतावा तक ना होगा और समाज और देश रोएगा..

और हमारी औलादें जितनीं दादा गुंडा टाइप निकलेंगी हमारा सीना उतना ही फूलेगा.. और हम अपने आपको भाग्यशाली और मेहफ़ूज़ समझेंगे.. क्योंकि हमारा भाग्य अब गुंडे बदमाशों के हाथों हो चला है.. और यहाँ तक कि हमारे भगवान् ईश्वर अल्लाह भी कबके इनके रहमो करम पर ही हैं..

इसलिए यदि उचित समझो तो भगवान् ईश्वर अल्लाह को छोडो या ना छोडो - पर गुंडे बदमाशों को कहीं का नहीं छोडो.. या फिर ढूंढों उनको जो प्यार प्रीत शांति सभ्यता सौहार्द और अहिंसा के पाठ सिखा सकें.. या हो औकात तो खोजो एक और गाँधी को..

और यदि ये भी ना कर सको तो कम से कम न्यूनतम आवश्यक शुरुआत तो करो.. देश के माहौल को खराब कर देने के दोषी शाहों को तो हटाओ..

!! अहिंसा परमो धर्म: !!.. ॐ शांति ॐ !!.. हे राम !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Thursday, 18 January 2018

// 'पद्मावती' 'पद्मावत' की जय !!.. चारों खुजलियों की ऐसी की तैसी !!.. ..//


सुप्रीम कोर्ट ने 'पद्मावत' पर चार राज्यों द्वारा लगाया गया बैन हटा दिया है..

स्पष्ट हुआ भाजपा शासित चारों राज्यों द्वारा असंवैधानिक हरकत पटकी गई थी.. जो गंदी ओछी शर्मनाक धर्म-जाति की सोची समझी राजनीति के तहत ही करी गई थी.. जिसमें भाजपा पारंगत भी है.. 

सबसे शर्मनाक हरकत तो मध्यप्रदेश के शिवराज द्वारा पटकी गई थी.. जिसके द्वारा फिल्म तो छोडो - 'घूमर' डांस के गाने तक को बैन कर दिया था.. इसलिए मुझे तो डर लग रहा था कि इस पागलपन की वजह से कई भवनों में जो 'झूमर' लगे हैं कहीं इनके देशभक्त झुमरू कार्यकर्ता सनक में आकर अपने 'घूमर' का गुस्सा ये सारे 'झूमर' तोड़-ताड़ ना निकाल दें.. क्योंकि पागलपन सनक उन्माद साज़िश धूर्तता आदि  की कोई सीमाएं थोड़े ही होती हैं..

इसलिए अब भाजपा को थोड़ी शर्म भी आनी चाहिए.. पर आएगी नहीं .. शर्तिया नहीं आएगी.. क्योंकि इनका सारा दारोमदार टिका है इनकी मुख्य विचारधारा पर जिसका सूत्र है - "या बेशर्मी तेरा ही आसरा"..

और हाँ अब देखना होगा कि करणी सेना अपनी आन-बान-शान बचाने के लिए या आन-बान-शान गंवाने के लिए और क्या-क्या नहीं करती है या क्या-क्या करती है..

तो बोलो 'पद्मावती' की भी और 'पद्मावत' की भी जय !!..
और चारों खुजलियों की ऐसी की तैसी !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Wednesday, 17 January 2018

// रेप जैसे अपराध चलते रहेंगे.. पर पद्मावती नहीं चलेगी.. शर्म करो नालायकों !!.. //


जींद रेप केस !!..
पीड़ित लड़की की लाश पहले ही मिल चुकी थी..
अब बलात्कार और हत्या के आरोपी कातिल की भी लाश मिली है..

बस अब इस दौर में ये मत समझा देना कि..
मौतें दिल का दौरा पड़ने से हुई थीं..

वो क्या है ना कि मेरा दिल मानता नहीं कि जज लोया की मौत का कारण दिल का दौरा ही रहा होगा.. और जब तब कुछ ऐसा ही अविश्वसनीय सा बता दिया जाता है तो मेरा दिल दहल जाता है.. और तुम्हें बहुत गालियां देता है..  समझे ??

और हाँ एक बात और.. ये हरयाणा में तुमने पुलिस रखी हुई है या तुम जैसे ही बेशर्म और खटारा लोग जो शायद देहाड़ी डकैतों के माफिक इधर उधर मुंह मार दिन भर कमाई कर तुम्हारी अमानत तुम तक पहुंचा चादर तान सो जाते हैं.. और अटल दुर्घटना होने पर दिमाग का दहीं बना देते हैं और कहते हैं कि ऐसे जुर्म तो आदिकाल से होते रहे हैं और होते रहेंगे ??..

तो इस बात पर आदिकाल का एक और सच सुन लो.. ये नाकाबिल निकम्मे नकारा नालायक नीच लोग जब ऊपर से नीचे गिरते हैं ना - तो इनकी बहुत दुर्गति होती है..

और ये मत सोचना कि यदि हरयाणा में तुमने पूरी बेशर्मी कायरता के साथ पद्मावती फिल्म पर बैन लगा लोगों को फिल्म देखने से वंचित कर दिया है तो जनता कुछ नहीं देख रही है.. जनता सब देख रही है समझ रही है और तुम्हारी दुर्गति भी करेगी.. तैयार रहना नालायकों !!..    

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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// भंसाली जी !!.. अब खुद का नाम बदल कर देख लो - "संजय लीला माँ भंसाली ..//


अरे हो भंसाली जी !!.. काहे इतनी शानपत बता रहे हो भाई ??.. क्यों सबको परेशान कर रहे हो ??..

मुझे समझ नहीं आता कि यदि तुम्हारी फिल्म में कुछ आपत्तिजनक है ही नहीं तो फिर तुम्हारी फिल्म देखेगा कौन ??.. और अब जब अड़ंगा लग गया है और फिल्म चलने के आसार हो चले हैं - तो सभी अड़ंगाईयों को उनकी मेहनत और क्षमता के पूरे-पूरे पैसे क्यों नहीं टिका देते ??..

क्या कहा ??.. ना खाऊंगा ना खिलाऊंगा !!..

तो ठीक है.. फिर एक बार फिल्म का नाम "पद्मावत" से "पद्मा" भी कर के देख लो..

और तब भी काम ना बने तो फिर.. "पद्मा" से "पद माँ" करके देख लेना..

वो क्या है ना कि आजकल ये "माँ" बहुत चलन में है.. और ये जितने भी लोकल देसी सेना टुकड़ी वाले देशभक्त देशद्रोही टुच्चे गुंडे कवि शायर पार्टी वाले नेता अभिनेता देवता प्रवक्ता यानि लगभग सभी - ये "माँ" नाम से बहुत भावुक और संवेदनशील हो उठते हैं.. और यहां तक कि ये हमेशा मैं-मैं करने वाले भी "माँ-माँ" करने लगते हैं..

याद है ना.. अपने स्वयंभू मामा ने तो कह भी दिया था कि पद्मावती "राष्ट्रमाँ"..

इसलिए मैं तो बल्कि ये कहूंगा कि तुम तो खुद का नाम भी बदल कर - "संजय लीला माँ भंसाली" कर लो..

माँ कस्सम !! मैं गारंटी देता हूँ कि कम से कम मध्यप्रदेश के मामा तो खुद कहेंगे कि जाओ क्या याद रखोगे - फिल्म "राष्ट्रमाँ पद्मावती" के नाम से चला लो..   

और यदि तुम्हें नाम नहीं बदलना हो तो..
तो फिर यथायोग्य बाँट दो.. और घूमर सहित चला लो..

और दम हो तो इस देश में अभी भी कानून का राज है.. फिल्म तुम्हारी.. मर्जी तुम्हारी..
मैं तो केवल सलाह दे रहा हूँ.. श्रीमान संजय लीला माँ भंसाली जी..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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