Thursday, 24 May 2018

// इन्हें दो जूते मार कहो - आज खाना नहीं बस पुशअप.. चैलेंज भूत उतर जाएगा.. //


एक वायरस कुछ दिन पहले केरला से घुसा था.. 'निपाह' !!.. परन्तु थोड़ी ही तबाही मचा शायद ठहर गया है..

लेकिन ठीक इसके बाद एक और वायरस फ़ैल गया है.. कोई इसे 'पुशअप चैलेंज' कह रहा है कोई इसे 'फिटनेस चैलेंज' कह रहा है.. और ये उच्च कोटि के रईस मक्कारों में बहुत जल्दी फ़ैल रहा है.. इसे आप 'तबाह' वायरस कह सकते हैं..   

और अब हमारे बैठ-ठाले प्रधानसेवक से लेकर बहुत से सेलिब्रिटी इसकी चपेट में आ चुके हैं.. और इस वायरस का असर ये हो रहा है कि ये बिगड़ैल दिमागों को और सड़ा दे रहा है - और ये सामान्य सा तथ्य तक सोच समझ नहीं पा रहे हैं कि देश के करोड़ों मेहनतकश इंसानों को ना तो पुशअप की जरुरत है और ना ही थोथे फिटनेस की.. बल्कि उनकी जरूरत तो रोज़गार प्राप्त कर गरीबी से छुटकारा पाना है और भूख मिटाना है..

पर रईस पागल बावलों बेवकूफों में घुसा ये 'चैलेंज-चैलेंज' गेम का भूत तो अब तब उतरे ना जब कोई हर पुशअप पर दो जूते रसीद कर इनसे बोले कि आज खाना नहीं खाना - बस उठक बैठक लगाना - समझे !!

मेरा दावा है कि तब इन सब टुच्चों का चैलेंज देने और लेने का भूत तत्काल उतर जाएगा - ठीक वैसे ही जैसे जिन्ना का भूत अब उतर गया है !!..

आइए इस प्रकार हम 'निपाह' और 'तबाह' वायरस का सामना करें.. और देश की मुख्य समस्याओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखें.. !! जय हिन्द !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Wednesday, 23 May 2018

// कैबिनेट में तेल के भावों पर चर्चा तक नहीं.. आइए इनके दिमाग सुलगाएं !!.. //


सुबह से हवा बनाई जा रही थी कि मोदी चिंतित हैं और मोदी सरकार तेल की कीमतें कम करने के लिए कुछ करने वाली है..

पर अभी-अभी पता चला कि कैबिनेट की तो मीटिंग भी हो गई और तेल के बढ़ते दामों पर तो कोई चर्चा तक नहीं हुई.. मुझे लगता है कैबिनेट भूल गई होगी..

भूल चूक लेनी देनी.. मैं भी तो सुबह से इस सरकार की शान में कुछ भी कहना भूल गया था..

तो आइए सरकार की शान में मेरी बात भी सुनिए..

ये सरकार निकम्मी नकारा बदमाश नालायक बेशर्म दोगली जनविरोधी चोर उचक्की झूठी निर्लज्ज बेहया खराब दोषी फाँकू बुरी घमंडी दम्भी मक्कार लुटेरी टुच्ची है..

कुछ मैं भी भूल गया हूँ तो आप याद दिला दें.. पर जब तक तेल के भाव ठिकाने नहीं आते आप भी इनकी शान में कसीदे पढ़ते हुए इनके दिमाग सुलगाते रहने की कोशिशें करना नहीं भूलें..

धन्यवाद !! जय हिन्द !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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चल बावले !!.. फेंकने में स्पर्धा मत कर नहीं तो पकौड़े बेचोगे..


// मेरा महान हिन्दुस्तान .. बनाम .. पाकिस्तान-तालिबान.. //


ये सच है कि.. ये मेरा हिन्दुस्तान है.. ये मेरा देश है.. इस देश का अपना कानून भी है.. और यहाँ उसी कानून का राज भी है..

पर तौबा !!.. मेरे इसी हिन्दुस्तान में सभी कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए किसी इंसान को पीट-पीट कर मार भी दिया जाता है.. और जब ऐसा होता है तो बहुत पीड़ा होती है.. दिल झन्ना जाता है.. और दिमाग भन्ना जाता है..
   
और ऐसे में यदि कोई ये कह दे कि हिन्दुस्तान तो अब पाकिस्तान या तालिबान से भी बदतर हो गया है - तो इस देश में पाकिस्तानी और तालिबानी प्रवृत्ति के सांप्रदायिक लोग ऐसे प्रतिकार करने लगते हैं मानों उन्हें वाकई बुरा लग गया हो.. और इस बहाने वो देशप्रेम की डींगे हांकने लगते हैं और समाज में अपने आपको बेहतर नागरिक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिशें करने लगते हैं..

यानि होता ये है कि टुच्चे अपराधी अपना काम कर जाते हैं - बेचारे गरीब निर्दोष मारे जाते हैं - और जिन्हें पीड़ा होती है वे देशद्रोही करार दे दिए जाते हैं.. और मोटी चमड़ी के वे धूर्त लोग जिनमें इंसानियत बची ही नहीं है वे अपना कालर और दुपट्टा ऊँचा कर टुच्चई पेलने लगते हैं.. और इस देश के कर्ताधर्ता बन जाते हैं.. 

अतः उपरोक्त तथ्यों के मद्देनज़र मैं राजकोट में एक गरीब इंसान की पीट-पीट कर की गई हत्या के विरोध में अपनी पीड़ा और गुस्से का इज़हार बड़े ही नपे तुले शब्दों में रखना चाहूंगा.. ..

क्योंकि अपने देश हिन्दुस्तान में किसी इंसान को पीट-पीट कर मार दिया जाता है - तो ईश्वर अल्लाह के लिए आप ये मान लें कि - अपना देश तालिबान या पाकिस्तान से बहुत बेहतर होकर भी उतना ही बदतर बना दिया गया है..

और ये कारनामा किया है हमारे ही देश के कुछ टुच्चों ने जिनकी सोच मानसिकता व्यवहार और कार्यशैली यकीनन तालिबानियों और शायद पाकिस्तानियों जैसी ही है..

अब आप ही बताएँ कि मैंने ये तो नहीं कहा ना कि मेरा देश तालिबान और पाकिस्तान से बदतर हो गया है.. बल्कि मैंने तो यही कहने का प्रयास किया है कि मेरा देश हिन्दुस्तान महान है.. बहुत महान !!.. और कुछ हिन्दुस्तानी टुच्चे हैं - बहुत टुच्चे.. नहीं क्या ??..

इसलिए खबरदार यदि किसी भक्त ने हिन्दुस्तान की शान में कोई बद्तमीज़ी करी तो..
चीर देंगे !!.. फाड़ देंगे.. और खीर भी नहीं देंगे.. समझे !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Tuesday, 22 May 2018

// रतजगा सुप्रीमकोर्ट केजरीवाल-बनाम-"दिल्ली के वाला" टंटे में सुप्त सुन्न क्यों ??.. //


यकीनन जब दिल्ली देश की राजधानी है तो दिल्ली और दिल्लीवासी अति महत्वपूर्ण तो हुए ही.. और इसलिए दिल्ली से जुड़े सभी मुद्दे या रगड़े-टंटे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं..

पर अब तो यह बात जगजाहिर है कि हमारा सुप्रीम कोर्ट भी खुद के चुभते सालते उलझे मामलों में तो जनता के बीच आकर खुद के दुखड़े सुनाने लगता है - या फिर किसी एक व्यक्ति की फांसी के मामले में या किसी एक राज्य में किसी एक पार्टी की सरकार बनने या ना बनने के मामले में अँधेरी रात को भी जग उठ बैठ जाता है..
पर यही सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार के केजरीवाल और केंद्र के "दिल्ली वाले वजूभाईवाला" यानि बोले तो जंग बैजल के बीच के लगातार चले आ रहे रगड़े-टंटों के बीच - दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर लम्म्म्म्म्बे समय से चले आ रहे उलझे उलझाए मामले में सुप्त सुन्न बना बैठा है - ठीक वैसे ही जैसे देश की वो जनता जिसका कोई खुद का सगा जब तक ना मर जाए रोने से भी परहेज़ करती है - और जब कोई खुद का मर जाए तो विलापने दहाड़ने धिक्कारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती..

और ऐसा क्यूँ है ?? ये मैं बताता हूँ .. इसके केवल तीन मुख्य कारण हैं.. 

पहला कारण : -
इस देश में कानून सबके लिए एक जैसा नहीं है.. और तो और कानून के मायने या कानून के लागू होने या करने में भी अजब गजब विरोधाभास हैं.. और तो और यहां कानून बनाने वाले भी भिन्न-भिन्न तरह से भिनभिनाने वाले भन्नाए लोग हैं जो ना मालुम किस दिन क्या कह दें क्या कर दें क्या लिख दें क्या बना दें क्या पटक दें और क्या बता दें.. 
दूसरा कारण : -
कांग्रेस और भाजपा के चाल चरित्र में कोई अंतर नहीं है.. केवल चेहरे अलग-अलग हैं.. और चेहरे भी असली हैं या मुखौटे हैं इसका भी कोई अता पता नहीं है.. और कई बार तो यही लगता है कि ये 'दो जिस्म एक जान' ही तो हैं..
तीसरा कारण : -
केजरीवाल अलग ही मिटटी के बने हैं और वो १००% सही हैं.. दिल्ली में सभी अधिकार एक चुने हुए मुख्यमंत्री के पास होने चाहिए पर उनसे ये अधिकार सुनियोजित टुच्चे तरीकों से छीने गए हैं - और ऐसा इसलिए क्योंकि हर बंदे और हर उल्लू तक को पता है कि केजरीवाल को अपने अधिकारों का सदुपयोग करना आता है.. या यूँ कहें कि उन्हें उल्लुओं को उलटना आता है..

पर उपरोक्त परिस्थितियों से मैं पूर्णतः निराश नहीं हूँ.. क्योंकि मुझे ऐसी आशा है कि सुप्रीम कोर्ट जैसे ही स्वतंत्र और उन्मुक्त और स्वविवेकी हो जाता है वैसे ही केजरीवाल और दिल्ली और देश को ससमय पूर्ण न्याय मिलने लगेगा !!.. और तब सुप्रीम कोर्ट नहीं बल्कि कई उल्लू रात भर जागेंगे और दिन में तारे गिनेंगे !!.. सुप्रीम कोर्ट नहीं तो ऊपर वाले के न्याय पर तो भरोसा करना ही पड़ेगा !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Monday, 21 May 2018

// 'कर्नाटक के नाटक' और 'तेल के खेल' ने सिद्ध किया.. अंधभक्त भक्तों से बेहतर !!.. //


भला हो कर्नाटक के चुनावों का जिसकी वजह से पहले कोई २०-२२ रोज़ तक तेल के भाव नहीं बढे..

पर कर्नाटक के चुनाव निपटे नहीं - अंततः भाजपा गई तेल लेने और मोदी की भी औकात सबके सामने आ गई.. और तेल के भाव अपने नियत उच्चतम रिकॉर्ड की ओर फिसल लिए..

और सिद्ध हुआ कि स्वघोषित नसीब वाले मोदी अब हुए बदनसीब - क्योंकि उनकी नीयत और औकात की पोलें खुल गईं..

और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि शायद अब तो भक्तों को भी एहसास हो चला है कि अंधभक्तों के दिमाग में तेल तो बचा ही नहीं - बस शुष्क भूसा ही बचा है.. और इसलिए उनका ठस दिमाग चलने लगे इसकी कोई गुंजाईश बची नहीं..

और इसलिए ही तो अब अंधभक्त भी चिल्ला-चिल्ला कर यही कहने लगे हैं कि कॉंग्रेस के राज में भी तो यही सब होता था - मसलन ऐसे ही बेकार नकारा मन्दबुद्धिमान वफादार माननहीं राज्यपाल हुआ करते थे जो कोई यूपीएससी से सेलेक्ट होके थोड़े ही आते थे - और ऐसे ही तो जोड़-तोड़ करके सरकारें बनती थीं या तोड़ दी जाती थीं.. और ऐसे ही तो तेल के दाम मनमाने ढंग से बढ़ा करते थे..

यानि मानों अंधभक्त अब ये सिद्ध करने के कुप्रयास में कि उनकी मोदी वाली भाजपा सबसे अच्छी है - वस्तुतः अपने बावलेपन या बेवकूफी में यह सिद्ध करते जा रहे हैं कि भाजपा और कांग्रेस में तो कोई अंतर है ही नहीं - और मोदी किसी कॉंग्रेसी से भिन्न नहीं !!..

और अब भक्तों और अंधभक्तों में बस यही अंतर बचा है.. अंधभक्त मुखर हो अब भी मोदी के नामे टेके लगा रहे हैं और भक्त बेचारे क्षुब्ध हैं और खामोश रहकर तेल और तेल की धार देख पा रहे हैं..

यानि मैं पहली बार अनुभव कर रहा हूँ कि अंधभक्तों का प्रदर्शन भक्तों से देशहित में बेहतर सिद्ध हो रहा है..

इसलिए अंधभक्तों की जय हो !!.. और मेरी बला से भक्त जाएं मोदी के पास तेल लेने.. समझे !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Saturday, 19 May 2018

// कर्नाटक में हार चुके पप्पू ने ५६ इंची पहलवान को पटखनी दे मारी - वाह !! ..//


कर्नाटक के नाटक के प्रथम भाग का जो कुछ भी हश्र हुआ या पटाक्षेप हो गया.. उसके कारण मोदी जी दुखी या मासूम तो होंगे..

पर मुझे नहीं लगता कि शर्मिंदा भी होंगे..

अब भक्त तो कहेंगे ही कि ४० से १०४ पर पहुंचे और सबसे बड़े दल के रूप में उभरे तो फिर किस बात की शर्मिंदगी ??..

तो मेरा जवाब है कि जिस विधा में मोदी जी अपने आपको पारंगत समझते थे और पारंगत होने का दावा दम्भ भी भरते थे उसी विधा में एक पप्पू से हार गए !! .. तो अब शर्मिंदा नहीं होंगे तो फिर कब होंगे.. केजरीवाल से हारने पर ??..

और शर्मिंदगी तो इस बात पर भी होनी चाहिए कि एक प्रधानमंत्री होते हुए देश के प्रति आपको सौंपी गई जवाबदारियों की परवाह किए बगैर घटिया स्तर पर उतर कर जनता के पैसों का दुरपयोग कर जो २१ रैलियां की थी क्या वो सब करना जायज़ था ??..

इसलिए कहता हूँ कि जब-जब बदनीयती से और बदहवास हो ऊटपटांग करोगे और करवाओगे तो शर्मिंदा तो होना ही पड़ेगा और आपके विरोधियों को खुश होने का सुअवसर मिलेगा..

और मोदी जी विदित हो मैं खुश हुआ - किसीके जीतने के कारण नहीं बल्कि कर्नाटक में हार चुके पप्पू ने आपको पटखनी दे मारी इसलिए..  समझे ५६ इंची पहलवान जी !!.. हा !! हा !! हा !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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